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Monday, November 13, 2006

क्या आपका बच्चा आपकी बात नहीं मानता?

आजकल के माता पिता को यही चिंता रहती है कि उनके बच्चे उनकी बात नहीं मानते. ज़िद्दी होते जा रहे है, हर बात का पलटकर जवाब देते है, कई बच्चे दूसरों के सामने उनकी इज्जत नहीं करते. बच्चे प्लेन पेपर होते हैं जैसा नक्श बनायेंगे वह वैसा ही बनेगा. किसी जमाने में बड़ों के सामने बच्चे सर झुकाये खड़े रहते थे. हर काम के लिए अपने बड़ों की आज्ञा का इन्तजार करते थे. बदलते हुए इस दौर में आपके बच्चे आपकी आज्ञा का इन्तजार करेंगे यह सोचना शायद गलत होगा. बच्चो की परवरिश में कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा.
1. बच्चो के साथ उनकी उम्र के अनुसार ही व्यवहार करना चाहिए, कई माता-पिता बच्चों के साथ दोस्तों या हमउम्र की तरह बातें करने लगते जिससे बच्चों को लगने लगता हे कि ये तो हमारे जैसे ही हे. बच्चे इस समय दिमागी रुप से तैयार हो रहे होते है तो छोटी - छोटी बातें भी उनके दिमाग में घर कर जाती है, जिससे बदलना आगे जाकर बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिये बच्चो के साथ वक्त और हालात देखकर व्यवहार करें. प्यार के साथ साथ वक्त आने पर डांट फटकार या गुस्से का भी इज़हार करें.
2. बच्चों की हर जिद्द पुरी नहीं करनी चाहिए, इससे बच्चों का व्यवहार बिगड़ जाता है, वह जिद्दी हो जाते है, अगर बच्चे जिद्द करने लगे तो पहले उन्हे प्यार से समझाए फिर भी न माने तो गुस्से का इज़हार करें.
3. बात - बात पर पलटकर जवाब देने और चिल्लाकर बोलने से उन्हें रोकना चाहिए.
4. गुस्सा करना, बात -बात पर रुठकर मुँह फुलाना, बहुत ज्यादा और बहुत ज़ोर से हंसना, चुगली खाना, गाली बकना ये ऐसी खराब आदतें है जो एक बार पड़ गई तो उम्र भर नहीं छुटती है. इनसे बच्चों को रोकना चाहिए.
5. अगर बच्चा कहीं से किसी की चिज उठाकर ले आए तो उस पर सभी परिवार वालों को उससे खफा हो जाना चाहिए. बच्चे को बच्चे को समझाए कि ऐसा करना चोरी है जो कि एक बुरा काम है। उसे शर्म का एहसास कराए, बच्चे को मजबुर करे कि उस चिज को वही छोड़ आए जहां से लाया हे. ऐसे कामों से उसे नफरत दिलाने की कोशिश करे, कान पकड़कर उससे सॉरी कहलवायें, हाथ धुलाये कि तुमने गन्दा काम किया है फिर कभी ऐसा काम मत करना, जिससे उसके दिमाग में बैठ जाए कि किसी की चिज उठाना चोरी है और चोरी एक बुरा काम है।
6. बच्चे गुस्से में कोई चिज तोड़फोड़ करे, या किसी पर हाथ उठाये तो फौरन उसे डांटे, ऐसे समय में लाड़ प्यार न करे।
7. बचपन से ही उन्हें अपना काम खुद करने की आदत डाले. अपना स्कुल बेग, किताबें, अपने कपड़े खुद अपने हाथ से अपनी जगह पर रखे।
8. लोगों से मिलने जुलने, खाने पीने, शादी, पार्टी में उठने बैठने का तरीका सिखाना माता - पिता का फर्ज है।
9. कभी कभी घर के बुजुर्ग जैसे दादा-दादी, नाना- नानी आदि भी अधिक लाड़ प्यार में बच्चों को बिगाड़ देते हैं वे ये नहीं सोचते कि इस तरह वे बच्चो का भला नहीं बल्कि बुरा ही कर रहे है।

1 comments:

सागर चन्द नाहर said...

सारी बातें तो ठीक है पर आपका सुझाव क्रमांक 5 सरासर गलत है, अगर बच्चा कुछ चीज उठा कर ले आये तो उसे चोर कह कर शर्म का अहसास कराने का तरीका एकदम वाहियात है।
आप समझते हैं कि अगर बच्चा इस तरीके से सुधर जायेगा तो मैं मानता हूँ कि आप दिन में स्वप्न देख रहे हैं।
अपमानित कर बच्चे को कभी सुधारा नहीं जा सकता।
उपदेश देना और उन पर अमल करना बहुत मुश्किल है नितिन जी
बाइ ती वे आप विवाहित तो है या नहीं....?