Saturday, May 17, 2008

मां

आंखों का नूर है,
दिल का सुकून है मां.
घर की जन्नत है,
प्यार की मुर्त है, मां
साया भी जब साथ छोड़ दे..
तब भी अपने आंचल में छुपाती हैं मां.
बिछड़ जाए एक बार अगर
किसी खजाने से नहीं मिले जो,
वो अनमोल रतन है मां.

1 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत ही सुन्दर, उम्दा. बधाई.