आंखों का नूर है, दिल का सुकून है मां.घर की जन्नत है, प्यार की मुर्त है, मांसाया भी जब साथ छोड़ दे..तब भी अपने आंचल में छुपाती हैं मां.बिछड़ जाए एक बार अगरकिसी खजाने से नहीं मिले जो,वो अनमोल रतन है मां.
बहुत ही सुन्दर, उम्दा. बधाई.
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1 comments:
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